10 ऐसे क्रिकेट खिलाड़ी जो अंधविश्वास पर करते थे यकीन

क्रिकेट खिलाड़ियों के फॉर्म और प्रदर्शन पर तो निर्भर करता ही है लेकिन कुछ हद तक उनके किस्मत पर भी निर्भर करता है। कई बार अगर खिलाड़ी की किस्मत हो तो गेंद स्टंप पर लगने के बाद भी खिलाड़ी आउट नहीं होता। और अगर किस्मत खराब हो तो कैसे भी करके खिलाड़ी आउट हो ही जाता है। आज हम आपको बताएंगे ऐसे 10 खिलाड़ियों के बारे में जो ऐसे ही अंधविश्वास पर यकीन करते थे।

जहीर खान

भारत के लिए 600 अंतरराष्ट्रीय विकेट लेने वाले जहीर खान हमेशा अपनी जेब में एक पीले रंग का रुमाल लेकर जाते थे। अब इसी उनका अंधविश्वास कहें या कुछ और मगर इस चीज ने उन्हें बहुत बार सफलता दिलाई।

सौरव गांगुली

भारत की सबसे सफलतम कप्तानों में से एक सौरव गांगुली हमेशा अपनी जेब में अपने गुरु जी की फोटो लेकर मैदान में उतरते थे। अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट में 18000 से ज्यादा रन बनाने वाले गांगुली इसके अलावा भी कई अंधविश्वासों पर यकीन करते थे। इसकी वजह से उन्होंने कई बार अपनी टी-शर्ट का नंबर तक बदलवाया।

वीरेंद्र सहवाग

अपने करियर के शुरुआती दिनों में सहवाग ने 44 नंबर की जर्सी पहनी मगर उसके बाद अपने स्कोर में एक तरह का पैटर्न देखने के बाद उन्होंने अपने जर्सी से नंबर को हटवा दिया। वे क्रिकेट के इकलौते खिलाड़ी है जो बिना नंबर वाली जर्सी पहनकर खेलते थे।

अनिल कुंबले

साल 1999 में पाकिस्तान के खिलाफ दिल्ली में खेले गए उस ऐतिहासिक टेस्ट मैच को कौन भूल सकता है जहां अनिल कुंबले ने एक ही पारी में सारे 10 विकेट ले लिए थे। उस पारी के दौरान अनिल कुंबले जब भी बॉलिंग करने आते थे तो अपना स्वेटर और कैप अंपायर की जगह सचिन को पकड़ा देते थे। इस पैटर्न को उन दोनों ने कुंबले के अंतिम विकेट लेने तक जारी रखा।

सहवाग और तेंदुलकर

साल 2011 के विश्व कप फाइनल मुकाबले में लसिथ मलिंगा ने दोनो ही भारतीय ओपनर सहवाग और तेंदुलकर को आउट कर दिया था। इसके बाद सचिन सहवाग के साथ ड्रेसिंग रूम में बैठ गए और दोनों ने फाइनल मुकाबले में एक भी बॉल नहीं देखा।

स्टीव वॉ

पूर्व ऑस्ट्रेलियाई कप्तान स्टीव वॉ हमेशा मैदान में उतरने से पहले अपनी जेब में लाल रंग का रुमाल रखते थे जो उन्हें उनकी दादी ने दिया था। उनका कहना था कि यह रुमाल उनके लिए हमेशा अच्छी साबित होती थी।

रविचंद्रन अश्विन

भारतीय ऑफ स्पिनर रविचंद्रन अश्विन साल 2011 वर्ल्ड कप के दौरान हमेशा एक लकी बैग रखते थे। चाहे वह मैच खेल रहे हो या नहीं लेकिन यह बैग उनके साथ हमेशा रहता था।

सचिन तेंदुलकर

क्रिकेट के भगवान सचिन तेंदुलकर ने अंतरराष्ट्रीय मैच में 34000 से ज्यादा रन बनाएं और 100 शतक लगाया। लेकिन इतना बड़ा खिलाड़ी भी अंधविश्वास पर यकीन करता था। सचिन ने बताया कि वह हमेशा बाएं पैर का पैड पहले पहनते थे। अब इसे उनका अंधविश्वास कहें या कुछ और मगर इसने 16 साल के सचिन को 24 साल बाद क्रिकेट का भगवान बना दिया।

राहुल द्रविड़

अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट में 24 हजार से ज्यादा रन बनाने वाले राहुल द्रविड़ भी अंधविश्वास का शिकार थे। द्रविड़ हमेशा अपने दाएं पैर का पैड पहले पहनते थे। उन्होंने कहा कि उनकी यह आदत बचपन से ही थी।

लसिथ मलिंगा

श्रीलंकाई तेज गेंदबाज लसिथ मलिंगा हमेशा बॉल डालने से पहले उसे चूमा करते थे। साल 2004 में डेब्यू करने वाले मलिंगा ने अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट में तब हड़कंप मचा दिया जब 2007 विश्व कप में उन्होंने साउथ अफ्रीका के खिलाफ 4 गेंदों में 4 विकेट ले लिया।