6 ऐसे क्रिकेटर्स जिन पर आपराधिक मामले दर्ज हो चुके हैं

क्रिकेट एक ऐसा खेल है जिसमें खिलाड़ियों को सफलता पाने के बाद बहुत पैसा और शोहरत मिलती है। लेकिन कभी-कभी ऐसा होता है कि ये खिलाड़ी इतनी शोहरत को संभाल कर नहीं रख पाते हैं और कुछ ऐसी गलतियां कर देती हैं जो कानून की नजरों में एक अपराध होता है।

आज हम आपको ऐसी 6 क्रिकेटर्स के नाम बताएंगे जिन पर कभी ना कभी अपराधिक मामले दर्ज हो चुके हैं।

मोइन खान

पाकिस्तानी क्रिकेटरों का विवादों से बहुत गहरा ताल्लुक है। इसी कड़ी में एक नाम है मोइन खान का। मोइन खान के ऊपर अपनी बीवी के साथ शराब पीकर मारपीट करने के वजह से आपराधिक मामला दर्ज हुआ था। उनकी बीवी ने उनके खिलाफ यह मामला दर्ज कराया था जो उस वक्त पाकिस्तान में एक बहुत बड़ी खबर बन गई थी।

एस श्रीशांत

भारतीय तेज गेंदबाज श्रीसंत पर साल 2013 में हुए आईपीएल में स्पॉट फिक्सिंग के आरोप लगे थे। इन आरोपों की पुष्टि होने के बाद श्रीसंत पर आपराधिक मामले दर्ज हुए थे और उन्हें आजीवन भारतीय क्रिकेट से बैन कर दिया गया था।

जेसी राइडर

न्यूजीलैंड के बल्लेबाज जेसी राइडर पर साल 2013 में क्राइस्टचर्च के एक बीयर बार में मारपीट करने के आरोप लगे थे। इस लड़ाई में राइडर इतनी बुरी तरह घायल हो गए थे कि उनका जीवन भी खतरे में था। इस लड़ाई के बाद राइडर पर अपराधिक मामले दर्ज हुए थे।

हर्शल गिब्स

दक्षिण अफ्रीकी बल्लेबाज हर्शल गिब्स पर साल 2000 में मैच फिक्सिंग के आरोप लगे थे। भारत और दक्षिण अफ्रीका के बीच हुए टेस्ट मैच में फिक्सिंग करने वाले खिलाड़ियों में मोहम्मद अजहरुद्दीन का नाम प्रमुखता से सामने आया था। इसी के बाद दिल्ली पुलिस ने मोहम्मद अजहरुद्दीन, अजय जडेजा और हर्शल गिब्स पर आपराधिक मामले दर्ज किए थे।

महेंद्र सिंह धोनी

पूर्व भारतीय कप्तान महेंद्र सिंह धोनी पर भी आपराधिक मामले दर्ज हो चुके हैं। धोनी की एक पोस्टर सामने आई थी जिसमें वह भगवान विष्णु बने देख रहे थे और उनके एक हाथ में किसी कंपनी विशेष का जूता भी था। इसी पोस्टर को लेकर उनके ऊपर कर्नाटक हाईकोर्ट में हिंदू समाज के भावनाओं को ठेस पहुंचाने के लिए आपराधिक मामला दर्ज हुआ था।

नवजोत सिंह सिद्धू

पूर्व भारतीय ओपनर नवजोत सिंह सिद्धू पर साल 1988 में एक रोड एक्सीडेंट के बाद हुई लड़ाई में गुरनाम सिंह नाम के एक व्यक्ति का कत्ल करने का आरोप लगा था। दोनों के बीच हुई लड़ाई में गुरनाम सिंह को हार्ट अटैक आ गया और हॉस्पिटल ले जाने के क्रम में ही उनकी मृत्यु हो गई। कई सालों तक चले इस केस में साल 1999 में नवजोत सिंह सिद्धू को आखिरकार पंजाब हाई कोर्ट की तरफ से बेल मिल गई।