भारतीय टीम का ब्रह्मास्त्र था ये खिलाड़ी, पर रविंद्र जडेजा ने एक झटके में खत्म कर दिया इसका करियर

दोस्तों वैसे तो दुनिया भर में क्रिकेट की बहुत लोकप्रियता है, लेकिन भारत में क्रिकेट की लोकप्रियता काफी ज्यादा मात्रा में है। और इसकी इसी लोकप्रियता की वजह से नौजवान लड़के क्रिकेट को ना सिर्फ पसंद करते है, बल्कि उसे खेलते है, और उनमें से बहुत से लोगो का ख्वाब है, की वो एक बार भारतीय टीम के शामिल हो पाए। लेकिन दोस्तो आपको बता दे, की क्रिकेट में जितना मुश्किल सेलेक्ट होना है, उससे कही ज्यादा मुश्किल टीम में खुद की जगह बनाए रखना है। क्योंकि न सिर्फ टीम के अंदर बल्कि बाहर भी ऐसी बहुत से खिलाड़ी मौजूद होते है, जो काफी मुश्किल चुनौतियां देते है।

और कोई गेंदबाज किसी टेस्ट मैच में 10 विकेट लेने वाला जबरदस्त प्रदर्शन करे और फिर वो टीम से बाहर हो जाए और उसका कैरियर समाप्त हो जाए इस बात पर आपको जरा भीं यकीन नही होगा। लेकिन ऐसा एक उदाहरण प्रज्ञान ओझा है। जिन्हे टेस्ट मैच में 10 विकेट अपने नाम किए उसके बावजूद उन्हे टीम से बाहर का रास्ता दिखाया गया। और फिर दुबारा वो कभी टीम में वापिस नही आए।

दोस्तो आपको बता दे, की एक समय में ये खिलाड़ी भारतीय टीम का सबसे बड़ा हथियार माना जाता था, और इतना ही नहीं बल्कि आर अश्विन के साथ इस गेंदबाज की जोड़ी सोने पे सुहागा जैसी थी। बाएं हाथ के स्पिनर प्रज्ञान ओझा को 33 साल की उम्र में ही संन्यास की घोषणा करनी पड़ी थी और इसकी सबसे बड़ी वजह रवींद्र जडेजा बने।

प्रज्ञान ओझा ने 14 नवंबर 2013 को अपना आखिरी टेस्ट मैच वेस्टइंडीज के खिलाफ खेला था, जो सचिन तेंदुलकर का इंटरनेशनल क्रिकेट से विदाई मैच भी था। मुंबई में खेले गए इस टेस्ट मैच में प्रज्ञान ने दोनों पारियों में 40 रन पर 5 विकेट और 49 रन पर 5 विकेट चटकाते हुए 89 रन देकर 10 विकेट लेने का कारनामा किया था। इसके बाद ओझा के एक्शन पर सवाल उठा दिए गए। इसी कारण उन्हें मजबूरन टीम इंडिया से बाहर बैठना पड़ा। इसके बाद उन्होंने सुधार लाने ले लिया कड़ी मेहनत की। और आईसीसी से क्लीन चिट भी हासिल की।

लेकिन उस समय तक एमएस धोनी की गुडबुक में रविंद्र जडेजा अपना नाम लिखवा चुके थे। और भारतीय टीम में उनकी जगह पक्की हो चुकी थी। और इसी वजह से ओझा दुबारा कभी टीम में वापसी नहीं कर सके। दोस्तो आपको बता दे, की ओझा का जन्म ओडिशा में 5 सितंबर 1986 को हुआ था। और इनका कैरियर का आखरी टेस्ट मैच काफी यादगार साबित हुआ था। इस मैच में ओझा ने न सिर्फ 10 विकेट अपने नाम किए थे बल्कि ये महान बल्लेबाज सचिन तेंदुलकर के कैरियर का भी आखरी टेस्ट मैच साबित हुआ।

बता दे, की मुंबई में 14 नवंबर 2013 को शुरू हुए इस टेस्ट मैच में ओझा ने इस तरह की गेंदबाजी दिखाई थी, की उनका कहर करेबियाई बल्लेबाजों पर साफतौर पर देखा जा सकता था। और इस मैच का रिजल्ट मात्र 3 दिनो में सामने आ गया था। लेकिन इस दौरान सचिन के सन्यास की खबर ने प्रज्ञान ओझा की इस उपलब्धि को वही पर दबा दिया।

हालाकि इस दौरान उन्हे इस मैच का मैन ऑफ द मैच भी बनाया गया था। बता दे, की मुंबई में हुए इस टेस्ट मैच में प्रज्ञान ने दोनो पारियों में से पहली पारी में 40 रन देकर 5 विकेट और दूसरी पारी में 49 रन देकर 5 विकेट अपने खाते में डाले थे। और इतना ही नही बल्कि ये टेस्ट मैच 90 टेस्ट मैचों में से छठा सबसे जबरदस्त गेंदबाजी वाला टेस्ट मैच भी बना। और न सिर्फ इतना बल्कि ये टेस्ट मैच भारत की तरफ से वेस्ट इंडीज के खिलाफ तीसरे नंबर का सबसे सफल गेंदबाज प्रदर्शन वाला मैच था।

दोस्तो अगर इनके पूरे कैरियर को देखे तो प्रज्ञान ओझा ने अपने टी20 इंटरनेशनल कैरियर 2009 टी20 वर्ल्ड कप में बांग्लादेश के खिलाफ मैच में किया था। जहां इस दौरान ओझा में 29 रन देकर 4 विकेट अपने नाम किए थे। और उन्हे मैन ऑफ द मैच भी चुना गया था। लेकिन इन सब के बाद भी उनका टी20 कैरियर मात्र 6 मैच में 10 विकेट का होकर हो रह गया। और इस बीच एमएस धोनी भी उनकी गेंदबाजी में अपना पूरा विश्वास उन्हे नहीं दे पाए। इसके अलावा ओझा ने 2009 में श्रीलंका के खिलाफ कानपुर टेस्ट मैच में अपने टी20 इंटरनेशनल कैरियर की शुरुवात भी की थी।

उस टेस्ट में भारतीय जीत में उन्होंने 4 विकेट लिए थे। उन्होंने अपने 24 टेस्ट मैच के करियर में 30.26 के औसत से कुल 113 विकेट लिए। उन्होंने टेस्ट मैचों में 7 बार पारी में 5 विकेट और 1 बार मैच में 10 विकेट लेने का कारनामा किया था। वेस्टइंडीज के खिलाफ ओझा का प्रदर्शन ज्यादा शानदार रहा। उन्होंने कैरेबियाई टीम के खिलाफ 5 टेस्ट मैच में ही 31 विकेट अपने खाते में दर्ज किए थे। इसके अलावा ओझा ने टीम इंडिया के लिए 18 वनडे मैच में भी 21 विकेट अपने नाम किए थे।

आपको बता दे, की इस खिलाड़ी ने पहले ही सीजन में डेक्कन चार्जर्स के लिए आईपीएल में जगह पक्की कर ली थी। और इतना ही नहीं बल्कि डेक्कन का दक्षिण अफ्रीका की धरती पर साल 2009 में खिताब जिताने में भी ओझा में बहुत बड़ा योगदान दिया था। और इसी वजह से उन्हे भारतीय टीम के तीनो फॉर्मेट में यानी वनडे, टेस्ट और टी20 में डेब्यू करने शानदार मौका भी दिया गया था।

डेक्कन के साथ ओझा का आईपीएल का आखरी समय साल 2011 में था। जहां उन्होंने इन 4 सीजन में 56 मैचों में अपना हुनर दिखाया और 62 विकेट अपने खाते में डाले। और इस दौरान उनका औसत 23.59 और इकोनॉमी रेट 7.91 का था।