रविचन्द्रन अश्विन का बड़ा बयान, कहा- ‘अगर फिर से ऐसा हुआ तो, मैं क्रिकेट से संन्यास ले लूंगा’

दोस्तो वैसे तो आज तक हमे भारतीय क्रिकेट टीम के इतिहास में टीम में एक से बढ़कर एक खिलाड़ी देखने को मिले है। वही अगर हम स्पिनर्स की बात करे, तो टीम में सबसे खतरनाक स्पिनर अनिल कुंबले ही थे, और उनके जाने के बाद से ये जिम्मेदारी आज के बेहतरीन स्पिनर आर अश्विन ने बखूबी निभाई है। और फिलहाल आर अश्विन भारतीय टेस्ट टीम की जान बने हुए है।

दोस्तो अगर आर अश्विन के टेस्ट क्रिकेट की बात करे, तो इन्होने टेस्ट में काफी जोरदार प्रदर्शन किया। और अगर फिलहाल की बात की जाए तो उन्हे अब वॉशिंगटन सुंदर और अक्षर से जैसे दिग्गज खिलाड़ियों के सामने चुनौतियों का सामना करना पड़ रहा है। लेकिन दोस्तो आर अश्विन एक अलग ही स्तर के खिलाड़ी है। भले ही दोस्तो आर अश्विन की इन खिलाड़ियों से बराबरी या मुकाबले की बात की जाए, लेकिन इससे आर अश्विन बिलकुल भी परेशान नहीं है। क्योंकि आर अश्विन का ये मानना है, की वे हमेशा सबसे अच्छा देने में ध्यान देते है। और प्रतिस्पर्धा तो उन्हे और भी ज्यादा अच्छा करने के लिए उत्साहित करती है।

और अश्विन का मानना है, की जब मुझमें सुधार का जज्बा आना खत्म हो जाएगा तब मैं खुद ही क्रिकेट से सन्यास ले लूंगा। और इसी दौरान अश्विन ने आईसीसी डॉट कॉम से बातचीत के दौरान बताया, की टेस्ट क्रिकेट की खासियत ये है, की आप इसमें खुद एक दम परफेक्ट बनाने का सोचते है।

लेकिन आप उत्कृष्टता से भी खुशी प्राप्त कर सकते है। और मैं ऐसा ही करता हूं। आगे उन्होंने बताया, की मुझे लगता है कि मैंने अपने करियर में अब तक जो कुछ भी हासिल किया है, वो इसी नजरिये के कारण है, मैंने किसी भी चीज के लिए समझौता नहीं किया, लगातार सुधार की तलाश में रहता हूं।

मैं फिर से ये कहना चाहूंगा कि अगर मुझे अलग-अलग चीजें करना पसंद नहीं होगा और मैं कुछ नया करने के लिए धैर्य नहीं रख पाऊंगा या संतुष्ट हो जाऊंगा तो मैं खेल जारी नहीं रख सकता हूं। दोस्तो अश्विन का मानना है, की वह हमेशा अपने खिलाफ सवाल उठाने वाली के मुंह बंद करने के बारे में सोचते है। और इसी पर विश्वाश करते है।

आगे अश्विन ने बताया, की ऐसा नही है, की मैं विवादो का मजा उठाता हूं। लेकिन मुझे संघर्ष करना काफी अच्छा लगता है। और असली वजह यही है, की मैं यहां तक पहुंच पाया है। अगर मेरी जीत की बात करे, तो मैं जीत का उतना जश्न नहीं मनाता जितना मुझे असल में मानना चाहिए। क्योंकि मेरे लिए जीत मात्र एक घटना है।

मुझे लगता है, की ये सब योजना और समावेश से ही हमे मिलता है। और इतना ही नहीं बल्कि जीतने के बाद भी मैं सिर्फ यही सोचता हूं की क्या इससे बेहतर हो सकता था। और अगर ईमानदारी से बताऊं, तो मैं प्रदर्शन पर ज्यादा ध्यान नहीं देता।

मुझे ये चीज बिल्कुल पसंद ही नही है। की मैं किस वजह से पहचाना जाता हूं। भले ही भारत में आपको बहुत प्रशंसा होती है, लेकिन मैं एक साधारण व्यक्ति ही हूं। जो सिर्फ मैदान में खेल के द्वारा अपने लिए खुशी हासिल करता है।